स्तन स्वास्थ्य के लिए क्या करें और क्या न करें

ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जो दुनियाभर की महिलाओं में सबसे तेजी से बढ़ रही है। भारत में जितनी भी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि होती है, उनमें से आधी की मौत इलाज के दौरान ही हो जाती है। यही नहीं शहरी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर ग्रामीण महिलाओं से कई गुना ज्यादा पाया गया है। आमतौर पर इस कैंसर की शिकार 30 साल से लेकर 60 साल तक की महिलाएं हो रही हैं। हालांकि ब्रेस्ट कैंसर अनुवांशिक भी होता है, इसलिए इसे पूरी तरह रोक पाना अभी संभव नहीं हुआ है। लेकिन अगर शुरुआत से ही महिलाएं कुछ बातों का ध्यान रखें और अपनी लाइफस्टाइल सही रखें, तो वो ब्रेस्ट कैंसर से बच सकती हैं। वैज्ञानिकों ने तमाम रिसर्च करके इस बात का पता लगाया है कि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर को बढ़ावा देने वाले कारक कौन से हैं और उन्हीं के आधार पर हेल्दी लाइफस्टाइल के तरीके बताए हैं।

स्तन स्वास्थ्य के लिए क्या करें

किसी भी तरह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण होता है गलत खानपान। तमाम अध्ययनों के अनुसार प्रॉसेस्ड फूड्स में मौजूद पैराबीन्स और एलुमिनियम तत्व महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का एक बड़ा कारण हैं। इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि महिलाओं को शुरुआत से ही नैचुरल फूड्स की तरफ ज्यादा ध्यान देना चाहिए। सब्जियों, फलों, हर्ब्स, अनाज, नट्स और दालों से घर पर ही अपने लिए ताजा खाना बनाएं, बाहर का खाना और पैकेटबंद चीजों को कम से कम खाएं।

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर कई बार कुछ खास पोषक तत्वों की कमी के कारण भी होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार विटामिन डी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। विटामिन डी का सबसे अच्छा स्रोत सूरज की किरणें हैं, इसलिए रोजाना सुबह के समय जब धूप हल्की हो, तो थोड़ा समय धूप में बैठें। इसी तरह ओमेगा-3 फैटी एसिड भी ब्रेस्ट कैंसर को रोकने में सहायता करता है। इसलिए ओमेगा-3 वाले फूड्स जैसे- सैल्मन मछली, सैराडाइन मछली, अंडे, अखरोट, बादाम आदि खाएं। अगर इन दोनों विटामिन की ज्यादा कमी है, तो डॉक्टर से पूछकर सप्लीमेंट्स भी ले सकते हैं।

गलत ब्रा पहनने के कारण भी बहुत सारी महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर का शिकार हो जाती हैं। टाइट और गलत साइज की ब्रा पहनने से लिम्फ नोड्स से निकलने वाले लिम्फ फ्लुइड्स का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता है। इसके ब्लॉकेज के कारण कई तरह के टॉक्सिक केमिकल जमा हो जाते हैं, जो ब्रेस्ट कैंसर का कारण बनते हैं। इसलिए बहुत टाइट ब्रा नहीं पहननी चाहिए। हमेशा अपनी साइड के अनुसार ही ब्रा का चुनाव करें।

ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआत आमतौर पर स्तनों में गांठ से होती है, इसके बाद ही दूसरे लक्षणों की शुरुआत होती है। हर महिला को ब्रेस्ट कैंसर को पता लगाने के लिए सेल्फ एक्जाम की प्रैक्टिस करनी चाहिए, ताकि समय-समय पर जांच के द्वारा पनप रहे ब्रेस्ट कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में ही लगाया जा सके। ब्रेस्ट कैंसर की अपने से जांच कैसे कर सकते हैं- इसके लिए आप ऑनलाइन ट्यूटोरियल की मदद ले सकते हैं या डॉक्टर से पूछ सकते हैं। अगर संभव है तो 30 साल की उम्र के बाद महिलाएं साल में एक बार मैमोग्राम टेस्ट भी कराएं, ताकि ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाया जा सके।

स्तन स्वास्थ्य के लिए क्या न करें

स्तन स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए कुछ सावधानियाँ अपनानी चाहिए, जो संभावित जोखिमों को कम करने में मदद कर सकती हैं।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। इनसे दूरी बनाकर रखें।
बहुत टाइट ब्रा या अंडरवायर ब्रा से स्तनों में रक्त प्रवाह पर असर हो सकता है। आरामदायक और फिटिंग ब्रा का चयन करें।
प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी, और असंतुलित आहार स्तन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। संतुलित आहार, जैसे फलों, सब्जियों, और साबुत अनाज को प्राथमिकता दें।

शारीरिक निष्क्रियता से वजन बढ़ सकता है और हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जिससे स्तन कैंसर का जोखिम बढ़ता है। नियमित रूप से व्यायाम करें।
हार्मोनल थेरेपी या जन्म नियंत्रण गोलियों का लंबे समय तक उपयोग स्तन स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। इन्हें डॉक्टर की सलाह से ही लें।
लगातार तनाव भी हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकता है, जिससे स्तन स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। तनाव को नियंत्रित करने के लिए योग, ध्यान, या अन्य तनाव-प्रबंधन तकनीकों का अभ्यास करें।

स्तनों में किसी असामान्य बदलाव, गांठ या दर्द को नज़रअंदाज़ न करें। नियमित रूप से स्वयं-परीक्षण करें और यदि कुछ असामान्य लगे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
इन सावधानियों को अपनाकर आप स्तन स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रख सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top